असली-नकली
//दिनेश एल० "जैहिंद"
असली से मोह भंग हुआ !
नकली प्यारा लगे अब तो !!
रोबोट से सब काम होगा !
गुड़िया लगे प्यारा सब को !!
बच्चे भी अब मशीन से होंगे!
न भाव होगा, न प्रेम कोई भी!!
न दया-धर्म होगा न हया-शर्म!
न मान-दान, न स्नेह कोई भी!!
भेजा होगा सभी का नकली!
दिल भी होगा नकली ही जी!!
फेफड़े भी सबके होंगे नकली!
यकृत भी होगा नकली ही जी!!
युवतियाँ गुड्डा से करेंगी शादी!
युवक भी होंगे गुड्डी से राजी!!
सबके सब होंगे विचित्र जहाँ में!
नई दुनिया मारेगी तड़के बाजी!!
नकली तो अब असली लगे !
असली तो दिखे नकली ही जी !!
वह दिन दूर नही अब भैया !
दुनिया होगी अदली-बदली जी !!
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