Saturday, April 15, 2023

जगत झूठा

झूठा जगत

//दिनेश एल० "जैहिंद"


नाम बड़े और दर्शन छोटे !

लोग बहुत यहाँ ऐसे होते !!


ऊँची दुकान फीके पकवान !

बासी व्यंजन ग्राहक परेशान!!

बड़े गवैया और ओछी तान !

इनकी खैर तो करे भगवान !!


पक्के खब्बू व तन के मोटे,

नाम बड़े और दर्शन छोटे......


बड़े मक्खर, बड़े कंजूस !

होते हैं ये बड़े मक्खीचूस !!

जूस निकालें छिलकों से !!

भोजन खायें ठूसी ठूस !!


औरों को ये समझे खोटे,

नाम बड़े और दर्शन छोटे.......


जगत लोभी धीरज कहाँ!

साँस पर्यंत नहीं चैन जहाँ!!

मोह-माया है जगत झूठा!

आवागमन एक सत यहाँ!!


समझे नहीं जगत के टोटे

नाम बड़े और दर्शन छोटे


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असली-नकली

असली-नकली

//दिनेश एल० "जैहिंद"


असली से मोह भंग हुआ !

नकली प्यारा लगे अब तो !!

रोबोट से सब काम होगा !

गुड़िया लगे प्यारा सब को !!


बच्चे भी अब मशीन से होंगे!

न भाव होगा, न प्रेम कोई भी!!

न दया-धर्म होगा न हया-शर्म!

न मान-दान, न स्नेह कोई भी!!


भेजा होगा सभी का नकली!

दिल भी होगा नकली ही जी!!

फेफड़े भी सबके होंगे नकली!

यकृत भी होगा नकली ही जी!!


युवतियाँ गुड्डा से करेंगी शादी!

युवक भी होंगे गुड्डी से राजी!!

सबके सब होंगे विचित्र जहाँ में!

नई दुनिया मारेगी तड़के बाजी!!


नकली तो अब असली लगे !

असली तो दिखे नकली ही जी !!

वह दिन दूर नही अब भैया !

दुनिया होगी अदली-बदली जी !!


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गीत

 गीत

// दिनेश एल० "जैहिंद"


कोई गर कहीं बे-सहारा मिले !

चलके दो कदम लगा लो गले !!

कोई गर.........................

......................................



गर यूँ तुम कर ना सकोगे भला!

कब कोई तुम-सा होगा अगला!!

कोई गर...........................

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१)

देके सहारा बे-सहारों को जो तुम!

अपने हृदय से लगाओगे जो तुम !!

बद-दुआ की जगह दुआ ही लोगे!

खुदके दिल में बिठाओगे जो तुम !!

कोई गर..............................

...........................................


२)

आती रात प्यारे जैसे ही शाम ढले,

होती सुबह यारो जैसे ही रात टले !

नहीं यूँ दिखाओगे तुम जो कौशल,

किसी के दुख भला कब कैसे टले

कोई गर...............................

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रथ के दो पहिये

रथ के दो पहिये

//दिनेश एल० "जैहिंद"


देख डरो ना डराओ किसी को,

मिलके रहो प्रेम कहते इसी को।


ना पत्नी अब छिपकली से डरे,

ना पति कहाँ बेलन से डर करे।


सब झूठ - मूठ का दिखावा है,

ये जग तो बस एक छलावा है।


ना तुम तो बनो बटेर सुन प्रिये,

ना हम बनें बर्बर शेर सुन प्रिये।


ना डराओ पत्नी को साथियो,

ना सताओ पति को गृहिणियो।


ये संसार, इसकी सांसारिकता,

अपने हृदय में भाव लो इसका।


कब मैं तुमसे श्रेष्ठ था वो प्रिये,

देख तेरी अँखियों में हम जिये।


तुम अपना फर्ज निभाती चलो,

हम कर्म अपना करते रहें सुनो।


जो झुकता है वहीं जिंदा रहता,

जो अकड़ता,वो जल में बहता।


हम हैं रथ के दो पहिये कब से,

बिन पहिये के कब चला रथ ये।


गृहस्थी के बोझ लाद कर चलें,

आओ, ईश के आदेश पर चलें।


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Thursday, April 13, 2023

दुल्हनिया



दुल्हनिया

// दिनेश एल० जैहिंद



इन मर्दों को कौन समझाए

दुल्हनिया के पल्ले मत पड़ना !

पड़कर बहुरिया के संगत में

अपना जीवन नर्क मत करना !!


दुल्हनिया की भूख तुम्हारी

तुम्हें भूखे-नंगे कहीं सुला देगी !

कोल्हू के बैल के जैसे भैया

भर-भर आँसू तुम्हें रुला देगी !!


पति परमेश्वर का युग नहीं 

नारी-ईश्वर का है ये युग आया !

खूब सताए तुम देवियों को

अब सहो उनकी ये धूप-छाया !!


दुल्हनिया के फेरे में जो रहे 

बंदर कभी छछून्दर बना देगी !

नहीं बचोगे त्रिया-चरित्र से

"ताता-थैया" नाच नचा देगी !!


दुल्हनिया की जी-हजुरी में

मैं दिन-रात लगा रहता हूँ भैया !

सोते पैर दबाऊँ, जगते ही मैं

पेश सामने चाय करता हूँ भैया !!


मैके जाने की धमकी के संग

मरने की धमकी भी सुनता हूँ जी !

गल-फाँसी की धमकी सुनके

जेल जाने से अब मैं डरता हूँ जी !!


शादी का लड्डू बड़ा अजीब

खाए सो भी पछताए जग में जी !

ना खाए ये लड्डू जो भी वो

तिल-तिल पछताए जीवन में जी !!


ये दुल्हनिया की चाहत कैसी

जिया हर पल प्रिये-प्रिये रटता है !

प्रियतमा बिनु रहा जाता नहीं

जीवन उसी संग दुख में कटता है !!


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जगत झूठा

झूठा जगत // दिनेश एल० "जैहिंद" नाम बड़े और दर्शन छोटे ! लोग बहुत यहाँ ऐसे होते !! ऊँची दुकान फीके पकवान ! बासी व्यंजन ग्राहक परेशा...