गीत
// दिनेश एल० "जैहिंद"
कोई गर कहीं बे-सहारा मिले !
चलके दो कदम लगा लो गले !!
कोई गर.........................
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गर यूँ तुम कर ना सकोगे भला!
कब कोई तुम-सा होगा अगला!!
कोई गर...........................
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१)
देके सहारा बे-सहारों को जो तुम!
अपने हृदय से लगाओगे जो तुम !!
बद-दुआ की जगह दुआ ही लोगे!
खुदके दिल में बिठाओगे जो तुम !!
कोई गर..............................
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२)
आती रात प्यारे जैसे ही शाम ढले,
होती सुबह यारो जैसे ही रात टले !
नहीं यूँ दिखाओगे तुम जो कौशल,
किसी के दुख भला कब कैसे टले
कोई गर...............................
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